एक बार की बात है एक गाँव में धोबी रहता था,उसके पास एक गधा था, वो धोबी हर एक दिन गधे पर अपने गांव से गंदे कपड़े ले जाकर नदी किनारे साफ करता था,और फिर साफ करने के बाद गधे के ऊपर डाल कर घर ले आता था, वो धोबी अपनी जिंदगी में बहुत खुश था, एक दिन धोबी ने अपने बेटे के साथ गाँव के पास वाले मार्केट गए और साथ में गधा भी था,
उस दिन बहुत ही भीषण गर्मी थी, तो कुछ देर पैदल चलने के बाद धोबी ने अपने बेटे से कहा की तुम गधे पर बैठ जाओ इतना नहीं चल पाओगे,उसके बाद बेटे ने गधे पर बैठ गया, ऐसे ही कुछ देर चलता गया, अचानक रास्ते में एक मुसाफिर मिला मुसाफिर बोले कितनी दु:ख की बात है कि एक बूढ़े आदमी इतनी भीषण गर्मी में पैदल चल रहे हैं और इतना बड़ा लड़का गधे पर बैठा है, फिर धोबी के बेटे ने अपने आप को गलती समझने लगा,और अपने पिताजी को कहा कि पिताजी आप बैठ जाओ मैं पैदल ही चलता हूं।
उसके बाद कुछ देर ऐसे ही चलता रहा फिर एक मुसाफिर मिला,वो मार्केट से आ रहे थे,तो उसने बोला की कैसा स्वार्थी आदमी है,की खुद गधे पर बैठा है और बच्चे को पैदल चला रहा है इतना गर्मी में, फिर उसके पिताजी ने गधे से उतर गया उसके बाद कुछ देर पैदल चलने के बाद मार्केट आ गया फिर दोनों ने खरीदारी की और धोबी ने अपने बेटे से कहा की आज के युग में हम सभी को खुश नहीं कर सकते।
और ये बात सही में 100% सही है।
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